भोजन से पूर्व 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' मंत्र का उच्चारण करने से अन्न के दोष नष्ट होते हैं, भोजन प्रसाद बन जाता है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।
सनातन धर्म में भोजन को केवल शारीरिक आवश्यकता नहीं, बल्कि ब्रह्म का स्वरूप (अन्नं ब्रह्म) माना गया है।
भोजन पकाने और ग्रहण करने से पहले माता अन्नपूर्णा (जो सृष्टि का पोषण करती हैं) का स्मरण करना अन्न दोषों को दूर करता है।