अनुष्ठान की पात्रता और नियम
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अनुष्ठान में भूमि शयन और मौन का क्या महत्व है?
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संक्षिप्त उत्तर
भूमि शयन: ऊर्जा के ग्राउंडिंग से बचने के लिए केवल कुशा या ऊनी कंबल पर शयन। मौन: व्यर्थ प्रलाप और असत्य भाषण से बचने के लिए अनुष्ठान कक्ष के बाहर भी न्यूनतम संवाद।
ऊर्जा के भूमिगत (Grounding) होने से बचने के लिए साधक को पृथ्वी पर केवल कुशा या ऊनी कंबल बिछाकर शयन करना चाहिए।
व्यर्थ के प्रलाप और असत्य भाषण से बचने के लिए अनुष्ठान कक्ष के बाहर भी न्यूनतम संवाद या मौन (Mauna) का पालन उचित माना गया है।
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