सात्विक आहार इसलिए जरूरी है क्योंकि तामसिक आहार और प्रवृत्तियाँ मंत्र की सात्विक और उपचारात्मक ऊर्जा को तुरंत नष्ट कर देती हैं। प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा सर्वथा वर्जित हैं।
अनुष्ठान के दौरान साधक का आहार पूर्णतः सात्विक होना चाहिए। गरिष्ठ भोजन, प्याज और लहसुन का प्रयोग सर्वथा वर्जित है।
कुछ साधक अनुष्ठान की अवधि में केवल फलाहार या एक समय के सात्विक भोजन पर ही निर्भर रहते हैं।