अर्घ्य का जल जब पृथ्वी पर गिरे तो: उस अमृततुल्य जल को दाहिने हाथ की उंगलियों से स्पर्श करके मस्तक, कंठ और दोनों नेत्रों पर लगाएं। यह सूर्य ऊर्जा के आत्मसातीकरण की प्रक्रिया है।
अर्घ्य का जल पृथ्वी पर गिरने के पश्चात्, उस गिरे हुए जल (जिसे अमृततुल्य माना जाता है) को अपने दाहिने हाथ की उंगलियों से स्पर्श कर अपने मस्तक, कंठ और दोनों नेत्रों पर लगाना चाहिए।