अर्घ्य के बाद: अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें। फिर सूर्य देव को साष्टांग (8 अंगों से) या पंचांग (5 अंगों से) प्रणाम करें।
अर्घ्य का जल अपने मस्तक, कंठ और नेत्रों पर लगाने के पश्चात्, अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करनी चाहिए।
तदनंतर सूर्य देव को साष्टांग या पंचांग प्रणाम करना चाहिए।