महाभारत
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अर्जुन का गांडीव धनुष कहाँ से मिला?
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संक्षिप्त उत्तर
गांडीव धनुष मूलतः वरुणदेव के पास था जिसे उन्होंने अग्निदेव को दिया। खांडव वन दाह के समय अग्निदेव ने अर्जुन को यह दिव्य धनुष और अक्षय तरकश प्रदान किया। इसीलिए अर्जुन 'गांडीवधारी' कहलाए।
अर्जुन का प्रसिद्ध 'गांडीव' धनुष उन्हें खांडव वन दाह के अवसर पर अग्निदेव ने प्रदान किया था, जिन्होंने इसे वरुणदेव से लेकर आए थे।
गांडीव की उत्पत्ति की कथा महाभारत में इस प्रकार है: ब्रह्माजी ने एक दिव्य वृक्ष के तने से विश्वकर्मा को तीन महान धनुष बनाने को कहा — पिनाक, शार्ङग और गांडीव।
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