दिव्यास्त्र
?
अर्जुन को अंतर्धान अस्त्र कैसे मिला?
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संक्षिप्त उत्तर
वन पर्व में अर्जुन की तपस्या से प्रसन्न होकर स्वर्गलोक में कुबेर ने उन्हें चारों लोकपालों की दिव्य सभा में अपना परम प्रिय अंतर्धान अस्त्र प्रदान किया।
महाभारत के वन पर्व में जब अर्जुन आसन्न युद्ध के लिए दिव्यास्त्र प्राप्त करने हेतु महान तपस्या पर निकले तो उनकी यात्रा उन्हें स्वर्गलोक तक ले गई।
भगवान शिव को प्रसन्न कर पाशुपतास्त्र प्राप्त करने के बाद अर्जुन से मिलने के लिए स्वयं चारों लोकपाल — इंद्र, वरुण, यम और कुबेर — उपस्थित हुए।
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