अर्जुन ने शिखंडी की आड़ से गांडीव के बाणों की निरंतर वर्षा से भीष्म को शरशय्या पर गिराया। कोई एकल दिव्यास्त्र नहीं — बाणों की अविराम धारा से शरीर छलनी हुआ।
अर्जुन ने भीष्म को गिराने के लिए मुख्यतः साधारण बाणों की अविराम वर्षा की — न कि किसी एकल दिव्यास्त्र का प्रयोग किया।
यह प्रसंग महाभारत के भीष्मपर्व में है। कुरुक्षेत्र के 10वें दिन श्रीकृष्ण की सलाह पर पांडवों ने शिखंडी को भीष्म के सामने रखा।