असाध्य रोगों के लिए असितांग भैरव का ध्यान कैसे करें?
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संक्षिप्त उत्तर
असाध्य रोग के लिए सौम्य, पालक स्वरूप पर ध्यान करें — रौद्र स्वरूप से विचलित न हों। यह पालक स्वरूप आयु वृद्धि और आधि-व्याधि से मुक्ति देता है।
असाध्य रोगों के निवारण के लिए साधक को भैरव के रौद्र या तामसिक स्वरूपों से विचलित हुए बिना, बटुक भैरव के समान उनके सौम्य, पालक स्वरूप पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
बटुक भैरव अभय देने वाले हैं, और असितांग भैरव का यह पालक स्वरूप आयु में वृद्धि और समस्त शारीरिक तथा मानसिक कष्टों (आधि-व्याधि) से मुक्ति प्रदान करने वाला है।