अशोक वाटिका में सीता जी की सबसे प्रमुख और सच्ची साथी त्रिजटा थीं, जो विभीषण की पुत्री और रामभक्त थीं। अन्य राक्षसियाँ सीता को प्रताड़ित करती थीं, पर त्रिजटा ने उन्हें हमेशा धैर्य और रामनाम से सहारा दि
जब रावण ने माता सीता का हरण कर उन्हें लंका की अशोक वाटिका में बंदी बनाया, तब वहाँ उनकी देखरेख के लिए अनेक राक्षसियाँ नियुक्त की गई थीं।
इनमें से अधिकांश सीता जी को डराती और रावण से विवाह करने पर दबाव बनाती थीं।