अष्टलक्ष्मी = देवी लक्ष्मी के आठ विशिष्ट रूप जो मानव जीवन के आठ विभिन्न आयामों को पूर्णता देते हैं। एकांगी धन मनुष्य को भ्रष्ट कर सकता है — अष्टलक्ष्मी का समग्र आशीर्वाद पूर्णत्व की ओर ले जाता है।
संसार में मानव जीवन की आवश्यकताएँ केवल मुद्रा या स्वर्ण तक सीमित नहीं हैं।
एक व्यक्ति जिसके पास अपार धन है, परंतु वह रुग्ण है, तो वह धन उसके लिए व्यर्थ है।