अश्वत्थामा के पास ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र, नारायणास्त्र (पिता द्रोण से) और जन्म से माथे में 'सिरोन रत्न' मणि थी जो सभी से रक्षा करती थी। यह मणि बाद में अर्जुन ने निकाल ली।
अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र था और उसे पिता से असाधारण अस्त्र-शस्त्र शिक्षा मिली थी।
उसके पास महाभारत के सबसे शक्तिशाली दिव्यास्त्र थे। ब्रह्मास्त्र — पिता द्रोणाचार्य से प्राप्त। यह अस्त्र उसने अर्जुन पर चलाया था।