असिपत्रवन में — तलवार-पत्तों से अंग छिन्न-भिन्न, दावाग्नि, भयावह पक्षियों का आक्रमण, सिंह-व्याघ्र-कुत्तों द्वारा भक्षण। पहले अग्नि यातना, फिर छाया माँगने पर असिपत्रवन।
गरुड़ पुराण में असिपत्रवन नरक की यातनाओं का अत्यंत भयावह वर्णन है।
तलवार-पत्तों से अंग-भंग — 'असिपत्र के पत्तों से वह जीव उस वन में छिन्न-भिन्न हो जाता है।