अस्त्र विद्या परशुराम (सर्वश्रेष्ठ गुरु), द्रोणाचार्य, शिव-इंद्र-यम जैसे देवताओं से सीखी जाती थी। गुरु पात्रता देखते थे — शारीरिक बल नहीं, मन-आत्मा की शुद्धि जरूरी थी।
प्राचीन काल में अस्त्र विद्या की शिक्षा कुछ विशेष गुरुओं से ही मिलती थी — यह सर्वसाधारण के लिए नहीं थी।
परशुराम — सबसे महान अस्त्र-शिक्षक माने जाते थे। उन्होंने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को अस्त्र-विद्या दी।