अथर्ववेद में जल को देवी स्वरूप और रोगनाशक माना। शुद्धि विधियाँ: उबालना, सूर्यप्रकाश, तुलसी, ताँबे का पात्र, कुश घास — इन सभी के पीछे आधुनिक विज्ञान ने एंटीमाइक्रोबियल गुण सिद्ध किए हैं।
अथर्ववेद को औषधि, विज्ञान और व्यावहारिक जीवन-ज्ञान का भंडार माना जाता है। इसमें जल की महत्ता और शुद्धिकरण विधियों पर कई सूक्त हैं।
जल की स्तुति — अथर्ववेद (1। 2) में जल को 'आपः' कहा गया है।