अथर्ववेद का मुख्य विषय आरोग्य, चिकित्सा, ओषधि, गृहस्थ जीवन, राज्यशास्त्र, रक्षा-मंत्र और ब्रह्मज्ञान है। इसमें 5977 मंत्र और 20 कांड हैं। भारतीय चिकित्सा परंपरा (आयुर्वेद) का मूल इसी वेद में देखा जाता
अथर्ववेद चारों वेदों में चतुर्थ है और अपने विषय-वैविध्य के कारण अत्यंत विशिष्ट है।
'अथर्व' शब्द का अर्थ है — अकंपित, स्थिर बुद्धि से किया गया कर्म। यह वेद आत्मज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन के अनेक पहलुओं को समेटता है।