अतिरात्र = रात भर चलने वाला सोमयाग (7 प्रकारों में छठवाँ)। विशेषता: चौथा सवन (रात्रि), अश्विनीकुमार ग्रह (भोर में)। 16 ऋत्विज्। 1975 और 2011 में केरल में सम्पन्न — Frits Staal द्वारा documented। आज अत
अतिरात्र सोमयाग की एक विशिष्ट और विस्तृत श्रेणी है।
'अति' + 'रात्रि' = रात्रि से आगे (रात भर चलने वाला) — यह यज्ञ जो रात्रि में भी निरन्तर चलता रहता है।