आवाहन मंत्र है — 'ॐ आगच्छ आगच्छ देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहः। क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुरसत्तम। आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि।।' — हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर देवता का ध्यान करते हुए बोलें।
आवाहन षोडशोपचार पूजा का प्रथम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपचार है।
आवाहन का अर्थ है — देवता को सादर आमंत्रित करना और मूर्ति या चित्र में उनकी उपस्थिति का आग्रह करना।