गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा पर शुभ मुहूर्त में — 'सजहु बारात बजाइ निसाना।' हाथी-घोड़े-रथ सजाये, ब्राह्मण-मुनि-सेना साथ लिये। भव्य बारात अयोध्या से जनकपुर चली।
दूतों का संदेश पाकर और गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा से राजा दशरथ ने शुभ मुहूर्त में बारात सजाकर अयोध्या से जनकपुर की ओर प्रस्थान किया।
वसिष्ठजी ने कहा — 'सजहु बारात बजाइ निसाना' — बारात सजाओ, डंका बजवाओ।