बभ्रुवाहन त्रेता युग के महोदय नगर के राजा थे — यज्ञानुष्ठानपरायण, दानियों में श्रेष्ठ, ब्राह्मणभक्त और धर्मपरायण। गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में इनकी कथा दान-महिमा और प्रेत-मुक्ति के उपदेश के रूप मे
गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय 'बभ्रुवाहन प्रेत संस्कार' में राजा बभ्रुवाहन की कथा का वर्णन है।
यह कथा दूसरे के दिए श्राद्ध-दान से प्रेत-मुक्ति के विषय में एक प्रामाणिक उदाहरण है।