विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय 'बभ्रुवाहन प्रेत संस्कार' में राजा बभ्रुवाहन की कथा का वर्णन है। यह कथा दूसरे के दिए श्राद्ध-दान से प्रेत-मुक्ति के विषय में एक प्रामाणिक उदाहरण है।
गरुड़ पुराण में बताया गया है — 'पूर्वकाल में त्रेता युग में महोदय नाम के रमणीय नगर में महाबलशाली और धर्मपरायण बभ्रुवाहन नामक एक राजा रहता था।'
चरित्र-वर्णन — राजा बभ्रुवाहन के विषय में गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'वह यज्ञानुष्ठानपरायण, दानियों में श्रेष्ठ, लक्ष्मी से सम्पन्न, ब्राह्मणभक्त तथा साधु पुरुषों के प्रति अनुराग रखने वाला, शील तथा आचार आदि गुणों से युक्त था।'
शासन-विधि — 'क्षात्रधर्मपरायण वह राजा औरस पुत्र की भाँति धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करता था।'
यह राजा बभ्रुवाहन महाभारत के अर्जुन-पुत्र बभ्रुवाहन से भिन्न हैं। गरुड़ पुराण में वर्णित ये त्रेतायुग के एक धर्मपरायण राजा हैं जिनकी कथा प्रेत-मुक्ति और दान-महिमा के उपदेश के लिए भगवान विष्णु ने गरुड़ को सुनाई।





