बभ्रुवाहन की कथा में प्रेत के कष्ट कैसे बताए गए हैं?
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संक्षिप्त उत्तर
बभ्रुवाहन कथा में प्रेत घोर वन में अकेला, संस्कारहीन, भूखा-प्यासा और कष्टग्रस्त था। कोई परिजन नहीं था जो उसके लिए श्राद्ध करे। राजा बभ्रुवाहन ने करुणावश उसके कष्ट देखे और दान-श्राद्ध से मुक्ति दी।
गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में बभ्रुवाहन कथा के प्रसंग में प्रेत-कष्टों का वर्णन भगवान विष्णु द्वारा गरुड़ को दिए ज्ञान के रूप में आता है।
इस कथा में प्रेत की स्थिति — प्रेत अंधकारमय घोर वन में भटक रहा है — गरुड़ पुराण के एक संदर्भ में उसे 'घोर वन में भटकते प्रेत' के रूप में वर्णित किया गया है।