बभ्रुवाहन कथा में राजा व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि एक प्रेत के कष्टों के साक्षी बनते हैं। वह प्रेत भूख-प्यास, भटकन और कष्टों में था। करुणावान राजा ने उसके लिए श्राद्ध-दान करके उसे मुक्त किया।
गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में बभ्रुवाहन की कथा में एक प्रेत के कष्टों का वर्णन है जिसे बभ्रुवाहन ने देखा और उसके लिए करुणा से श्राद्ध किया।
इस कथा का मुख्य विषय बभ्रुवाहन के व्यक्तिगत कष्ट का नहीं बल्कि उस प्रेत के कष्टों का है जिसे वे मुक्त करते हैं।