विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में बभ्रुवाहन की कथा में एक प्रेत के कष्टों का वर्णन है जिसे बभ्रुवाहन ने देखा और उसके लिए करुणा से श्राद्ध किया।
इस कथा का मुख्य विषय बभ्रुवाहन के व्यक्तिगत कष्ट का नहीं बल्कि उस प्रेत के कष्टों का है जिसे वे मुक्त करते हैं।
प्रेत के कष्ट — जैसा गरुड़ पुराण में प्रेत-योनि के संदर्भ में बताया गया है — प्रेत को भूख-प्यास, अकेलापन, यमदूत का भय, अंधकारमय भटकन और पापों का पश्चाताप — ये सभी कष्ट होते हैं।
राजा बभ्रुवाहन की भूमिका — यह धर्मपरायण राजा इस कष्टग्रस्त प्रेत को देखकर करुणा से भर जाते हैं और उसकी मुक्ति के लिए प्रयास करते हैं।
गरुड़ पुराण की यह कथा यह सिखाती है कि समाज में जब भी कोई प्रेत कष्ट में हो, एक करुणावान व्यक्ति उसके लिए उचित दान-श्राद्ध करके उसे मुक्ति दिला सकता है। यह दान का सर्वोच्च परोपकारी रूप है।




