जातकर्म (जन्म तुरंत — कान में मंत्र), छठी (6वें दिन), नामकरण (11-21 दिन)। गणेश-लक्ष्मी + कुल देवता पूजा। दान: ब्राह्मण भोज, गरीबों को भोजन। बाद: निष्क्रमण, अन्नप्राशन, मुंडन।
शिशु जन्म = सबसे शुभ अवसर; 16 संस्कारों में जातकर्म प्रमुख। जातकर्म संस्कार — जन्म तुरंत बाद; कान में मंत्र, शहद-घी।
नामकरण — 11वें/12वें दिन या 21वें दिन; शिशु का नाम। छठी पूजा — 6वें दिन; विधाता पूजन (कुछ परंपरा)। गणेश-लक्ष्मी — शिशु रक्षा, समृद्धि।