रामचरित की अपार महिमा — जो इस कथा को कहे-गाये वे सदा सुख पावें। 'चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु' — शिवजी का चरित्र समुद्र-सा अपार, वेद भी पार न पायें। सन्देश — विनम्रता, भक्ति और रामचरित महिम
बालकाण्ड के अन्त में तुलसीदासजी ने रामचरित की महिमा बताई — जो स्त्री-पुरुष शिव-पार्वती के विवाह की इस कथा को कहते और गाते हैं, वे कल्याणके कार्यों और विवाह आदि मंगलोंमें सर्वदा सुख पावेंगे।
छन्द — 'यह उमा संभु बिबाहु जे नर नारि कहहिं जे गावहीं।