रामचरितमानस — बालकाण्ड
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'संत असंत के लक्षण' — बालकाण्ड में संत और असंत में क्या अंतर बताया गया है?
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संक्षिप्त उत्तर
संत हंस के समान गुणरूपी दूध ग्रहण करते हैं, दूसरों के दोष ढकते हैं, कपास समान निरस और उज्ज्वल हैं। असंत (खल) किसी का भी हित सुनकर जलते हैं, दूसरों के दोष हज़ार आँखों से देखते हैं। दोनों एक ही संसार मे
बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने संत और असंत (दुष्ट) के लक्षणों में स्पष्ट अन्तर बताया है।
संत और असंत दोनों की उत्पत्ति एक ही संसार में होती है — 'उपजहिं एक संग जग माहीं।
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