रामचरितमानस — बालकाण्ड
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बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने अपने को क्या कहकर विनम्रता प्रकट की है?
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संक्षिप्त उत्तर
तुलसीदासजी ने स्वयं को 'मति अति नीच' (अत्यन्त नीची बुद्धि वाला), 'मन मति रंक' (मन-बुद्धि से कंगाल), और काव्य ज्ञान से रहित बताकर विनम्रता प्रकट की। कहा कि बुद्धि कंगाल है पर मनोरथ राजा है।
तुलसीदासजी ने बालकाण्ड में अपनी विनम्रता प्रकट करते हुए कई स्थानों पर स्वयं को अत्यन्त तुच्छ बताया है: 1। 'कबित बिबेक एक नहिं मोरें।
सत्य कहउँ लिखि कागद कोरें॥' — इसमें कहा कि काव्यसम्बन्धी एक भी बातका ज्ञान मुझमें नहीं है, यह मैं कोरे कागजपर लिखकर सत्य-सत्य कहता हूँ।
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