'बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि' — इसमें गुरु को क्या कहा गया है?
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संक्षिप्त उत्तर
इस दोहे में गुरु को 'कृपा सिंधु' (कृपा का समुद्र) और 'नररूप हरि' (मनुष्य रूप में साक्षात् भगवान विष्णु) कहा गया है। गुरु के वचनों को महामोह रूपी अन्धकार नष्ट करने वाली सूर्य-किरणें बताया गया।
इस दोहे में गुरु को दो विशेषणों से सम्बोधित किया गया है — 'कृपा सिंधु' (कृपा का समुद्र) और 'नररूप हरि' (मनुष्य रूप में साक्षात् श्रीहरि/भगवान विष्णु)।
पूरा दोहा — 'बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।