वट सावित्री=ज्येष्ठ अमावस्या(पति दीर्घायु)। बरगद पर जल+दूध+रोली→मौली बांधें→7 परिक्रमा→कथा सुनें→व्रत। सावित्री ने यमराज से पति प्राण वापस लिए। बरगद=अमरत्व।
वट सावित्री व्रत = ज्येष्ठ अमावस्या — सुहागिन महिलाओं का व्रत (पति दीर्घायु)।
कथा: सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए — वट(बरगद) वृक्ष के नीचे। प्रातः स्नान → सोलह श्रृंगार। बरगद पेड़ के पास जाएँ।