बिहुला ने अपने मृत पति (लक्ष्मिन्दर) को सर्प-दंश के बाद कैसे जीवित किया?
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संक्षिप्त उत्तर
बिहुला अपने पति के शव की अस्थियां लेकर देवलोक पहुँची। वहाँ उसने भगवान शिव के सामने बहुत भावपूर्ण नृत्य किया, जिससे शिवजी प्रसन्न हुए और माता मनसा ने लक्ष्मिन्दर को अमृत छिड़ककर जीवित कर दिया।
सर्प-दंश के बाद बिहुला अपने पति के शव को केले की नाव पर रखकर महीनों तक नदी में विपरीत दिशा में बहती रही, जब तक कि शव का मांस गलकर केवल अस्थियाँ (कंकाल) नहीं बचीं।
वह स्वर्ग की धोबिन 'नेती धोपनी' की मदद से देवलोक पहुँची।