नाम: सीधा नाम (राम/कृष्ण), कोई विधि/दीक्षा नहीं, भक्ति प्रधान। मंत्र: विशिष्ट संस्कृत, विधि-नियम, कुछ में दीक्षा, शक्ति प्रधान। 'कलौ नामैव केवलम्' — कलियुग में नाम सर्वश्रेष्ठ। दोनों = ईश्वर प्राप्ति।
नाम जप और मंत्र जप दोनों ईश्वर उपासना हैं, परंतु सूक्ष्म भेद है: नाम जप: भगवान का सीधा नाम — 'राम', 'कृष्ण', 'शिव'।
कोई विधि नहीं, कोई बंधन नहीं, दीक्षा नहीं। भक्ति/प्रेम प्रधान। 'कलौ नामैव केवलम्' — कलियुग में नाम ही पर्याप्त।