हाँ, भगवान सुनते हैं — गीता (9.22) में स्वयं कहा है। वे अन्तर्यामी हैं। प्रार्थना का तत्काल फल मन की शांति है। फल देरी से आए या अलग रूप में — इसके पीछे गहरा कारण है। वे देरी करते हैं, अनदेखा नहीं करते
यह प्रश्न हर उस मन में उठता है जो कभी गहरी तकलीफ में रहा हो।
और इसका उत्तर न केवल शास्त्रों में है, बल्कि करोड़ों भक्तों के जीवन-अनुभव में भी।