नाम महिमा एवं भक्ति
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भगवान का नाम लेने मात्र से पाप कैसे कटते हैं
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संक्षिप्त उत्तर
श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान का नाम जान-बूझकर या अनजाने में — किसी भी भाव से लिया जाए — पाप नष्ट होते हैं, क्योंकि नाम और नामी (भगवान) अलग नहीं हैं। नाम-उच्चारण से भाव-शुद्धि होती है जिससे पाप-प्रवृत्
भगवान के नाम में पाप-नाश की शक्ति क्यों है — इसके उत्तर में शास्त्र और अनुभव दोनों एक स्वर में बोलते हैं।
शास्त्रीय आधार — श्रीमद्भागवत में स्पष्ट कहा गया है कि भगवान का नाम प्रेम से, बिना प्रेम के, किसी संकेत के रूप में, हंसी-मजाक में, या यहाँ तक कि अपमान के रूप में भी लिया जाए — उससे मनुष्य के समस्त पाप
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