भक्ति के आँसू 'प्रेमाश्रु' हैं — हृदय की कठोरता पिघलने का संकेत। भागवत में अष्टसात्विक भाव में शामिल। भगवान के प्रति प्रेम और अपनी दूरी का एक साथ बोध होने पर आते हैं। यह कमजोरी नहीं, भक्ति की गहराई का
भक्ति में आँसू आना — यह उस अवस्था का चिह्न है जहाँ हृदय और भगवान के बीच की दूरी मिटने लगती है।
शास्त्रों और संतों ने इसे बहुत ऊँचा स्थान दिया है।