कृपा के संकेत — भीतरी शांति, सत्संग की ओर खिंचाव, संतोष का आगमन, संकट से बचाव, सही मार्गदर्शन, दूसरों में आनंद। कृपा धन से नहीं, मन की स्थिरता और भक्ति के गहरे होने से पहचानी जाती है।
भगवान की कृपा हमेशा धन, वैभव या चमत्कार के रूप में नहीं आती — अक्सर वह बहुत सूक्ष्म और गहरी होती है।
शास्त्रों और संत-वचनों में इसके कुछ संकेत बताए गए हैं।