भोग लगाने के बाद न्यूनतम 5-10 मिनट (आदर्शतः 15-20 मिनट) प्रतीक्षा करें। इस बीच मंत्र जप करें। भगवान को भोग लगाए बिना स्वयं भोजन न करें। भोग के बाद वह प्रसाद बन जाता है जिसे सम्मान से ग्रहण करें।
भगवान को अर्पित किया गया भोजन 'नैवेद्य' कहलाता है और भगवान द्वारा ग्रहण किए जाने के बाद वह 'प्रसाद' बन जाता है।
इसके विषय में शास्त्रों और परंपरा में स्पष्ट नियम हैं। भोग के बाद कितनी देर प्रतीक्षा करें: 1।