गीता (9.26) — एक पत्ता भी भक्तिभाव से दो तो स्वीकार। सबसे आसान तरीके — नाम-जप, दूसरों की सेवा, सत्य आचरण, किसी को कष्ट न देना, और निष्काम प्रेम। भगवान को महँगी सामग्री नहीं, भाव चाहिए।
इस प्रश्न का उत्तर स्वयं भगवान ने गीता में दिया है — और वह आश्चर्यजनक रूप से सरल है। गीता का उत्तर — श्रीकृष्ण कहते हैं (9।
26): 'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति। तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः।