भगवान ने कहा — 'जो कछु रुचि तुम्हरे मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं' — तुम्हारी सब इच्छा पूरी की। स्वयं उनके पुत्ररूप में जन्म लेंगे। मनु-शतरूपा = अगले जन्म में दशरथ-कौशल्या, भगवान = श्रीराम।
भगवान ने मनु-शतरूपा की कोमल, विनययुक्त और प्रेमरसमें पगी हुई वचन-रचना सुनकर कहा — चौपाई — 'सुनि मृदु गूढ़ रुचिर बर रचना।
कृपासिंधु बोले मृदु बचना। जो कछु रुचि तुम्हरे मन माहीं।