गीता (12.5): निराकार पर मन लगाना कठिन — मूर्ति ध्यान का केंद्र बिंदु। गीता (4.11): जो जिस रूप में भजे, भगवान उसी में प्रकट। मूर्ति = प्रतीक, सीढ़ी — ईश्वर तक पहुँचने का सुलभ माध्यम। रामानुज: यह ईश्वर
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बार-बार पूछा जाने वाला प्रश्न है। शास्त्रों और आचार्यों ने इसका गहन उत्तर दिया है।
मूर्ति पूजा क्यों आवश्यक (शास्त्रीय तर्क): 1। निर्गुण ब्रह्म का ध्यान कठिन — गीता (12।