भगवान शिव परब्रह्म, शाश्वत सत्य और शुद्ध चेतना के सर्वोच्च प्रतीक हैं। वे सृष्टि के आदि कारण हैं — जिनसे जगत उत्पन्न होता है, पोषित होता है और प्रलयकाल में विलीन हो जाता है। वे सगुण और निर्गुण दोनों ह
सनातन धर्म, भारतीय दर्शन, वेद और पुराणों के सुविस्तृत वाङ्मय में भगवान शिव का स्थान मात्र एक पौराणिक देवता की सीमा तक सीमित नहीं है; वे परब्रह्म, शाश्वत सत्य और शुद्ध चेतना के सर्वोच्च तथा अनंत प्रतीक
शैव दर्शन और वैदिक संहिताओं के गहन और विश्लेषणात्मक अध्ययन से यह पूर्णतः स्पष्ट होता है कि शिव न केवल सृष्टि के संहारकर्ता हैं, अपितु वे ही वह आदि कारण और मूल स्रोत हैं, जिनसे यह संपूर्ण चराचर जगत उद्