ध्रुव से प्रेरणा: पाँच वर्षीय बालक ने अटूट संकल्प से भगवान विष्णु को प्राप्त किया। भक्ति में डूबने पर सांसारिक इच्छाएँ विलीन हो जाती हैं। माँ का मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प ही सच्ची शक्ति है।
ध्रुव की कथा श्रीमद्भागवत पुराण के चतुर्थ स्कंध में वर्णित है।
यह एक पाँच वर्षीय बालक की कथा है जिसने अपनी माँ के अपमान का बदला लेने की जिद में वह पा लिया जो बड़े-बड़े ऋषि भी नहीं पा सके।