तंत्र साधना
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भैरव मंत्र जपने की सावधानियां
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संक्षिप्त उत्तर
भैरव साधना रात्रि में की जाती है। इसमें बिना गुरु के उग्र मंत्रों का जप नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य तथा पवित्रता का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।
भगवान काल भैरव शिव के अत्यंत उग्र और शीघ्र फलदायी स्वरूप हैं। उनकी साधना तांत्रिक और अघोर मार्ग में प्रमुखता से की जाती है।
भैरव मंत्रों के जप में अत्यंत सावधानी की आवश्यकता होती है, क्योंकि थोड़ी सी भी चूक नुकसान पहुंचा सकती है।
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