भजन-कीर्तन में लयबद्ध नाम-उच्चारण मस्तिष्क की अल्फा तरंगें सक्रिय करता है जिससे मन शांत होता है। नकारात्मक संस्कारों पर दिव्य संस्कार बनते हैं — यही चित्त-शुद्धि है। भागवत कहता है — जैसे अग्नि स्वर्ण
भजन और कीर्तन केवल भावना का उद्गार नहीं हैं — ये चित्त-शुद्धि के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक उपकरण हैं।
ध्वनि और मस्तिष्क — जब हम भगवान का नाम लयबद्ध तरीके से उच्चारित करते हैं, तो उसकी ध्वनि-तरंगें मस्तिष्क की अल्फा तरंगों को सक्रिय करती हैं।