साधना की सावधानियाँ
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भक्त-अपराध क्या होता है और इससे क्यों बचना चाहिए?
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संक्षिप्त उत्तर
भक्त-अपराध किसी भी संत, वैष्णव या भक्त की निंदा या अपमान है — यह सभी पुण्यों को नष्ट कर देता है और उग्र साधना के दौरान सबसे बड़ा अवरोध बनता है।
साधना के मार्ग पर सबसे बड़ा अवरोध भक्त-अपराध माना जाता है।
किसी भी वैष्णव, संत, उपासक, या भक्त की निंदा या अपमान करना सभी सुकृतों (पुण्यों) को नष्ट कर देता है, भले ही साधक कितनी भी उच्च पदवी पर क्यों न हो।
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