भक्ति एवं आध्यात्म
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भक्ति में समर्पण क्या है कैसे करें
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संक्षिप्त उत्तर
समर्पण का अर्थ है अपना मन, कर्म और फल सब भगवान को अर्पित करना। गीता का उपदेश है — 'यत्करोषि... मदर्पणम्।' — हर क्रिया भगवान को समर्पित करते जाएं।
समर्पण भक्ति का सर्वोच्च रूप है। नवधा भक्ति में इसे 'आत्मनिवेदन' कहते हैं — अपना सर्वस्व भगवान को अर्पित करना।
यह केवल बाहरी क्रिया नहीं — यह एक आंतरिक अवस्था है। समर्पण का अर्थ है — अपना शरीर, मन, बुद्धि, कर्म और फल सब भगवान को सौंप देना।
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