भक्ति
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भक्ति में दास्य भाव क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
ईश्वर=स्वामी, मैं=दास। हनुमान (सर्वोच्च — 'राम काज बिनु कहाँ विश्राम'), लक्ष्मण, गरुड़। 'तेरी इच्छा=सर्वस्व।' अहंकार↓↓, विनम्रता=मोक्ष द्वार।
दास्य भाव = ईश्वर = स्वामी, मैं = दास/सेवक: क्या है: 'मैं तेरा दास। तेरी सेवा = मेरा जीवन। ' विनम्रता + समर्पण।
उदाहरण: - हनुमान-राम: 'दास हनुमान' = दास्य भक्ति सर्वोच्च। 'राम काज किन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम। ' - लक्ष्मण-राम: 14 वर्ष सेवा = दास्य।
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