भक्ति रस
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भक्ति में शांत भाव क्या होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
शांत भाव: सबसे शांत-स्थिर भक्ति — तीव्र भावना रहित। 5 रसों में प्रथम+आधार। ईश्वर=निर्गुण ब्रह्म। भक्त=शांत-समभावी। गहन शांति+तृप्ति+समत्व। शुकदेव/चार कुमार/शंकराचार्य। 'आप हैं — बस।' ध्यान-प्रधान। 'अह
शांत भाव (शांत रस) = भक्ति का सबसे शांत, स्थिर, और गहरा रूप — बिना किसी तीव्र भावनात्मक उतार-चढ़ाव के।
शास्त्रीय: भक्ति रसामृत सिन्धु: 5 प्रमुख रसों में प्रथम — शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य, माधुर्य।
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