भक्तिकाल के प्रमुख संत — निर्गुण: कबीरदास, रैदास, गुरु नानक, दादू दयाल। सगुण राम भक्ति: तुलसीदास। सगुण कृष्ण भक्ति: सूरदास, मीराबाई, नरसी मेहता, चैतन्य महाप्रभु, रसखान। इस युग को हिंदी साहित्य का स्वर
भक्तिकाल हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग माना जाता है जो लगभग 14वीं से 17वीं शताब्दी तक फैला है।
इस काल में दो प्रमुख धाराएँ थीं — निर्गुण भक्ति (निराकार ईश्वर की उपासना) और सगुण भक्ति (साकार राम-कृष्ण की उपासना)।