रामचरितमानस — बालकाण्ड
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भरद्वाजजी का आश्रम कहाँ था?
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संक्षिप्त उत्तर
प्रयाग (प्रयागराज) में — गंगा-यमुना-सरस्वती के त्रिवेणी संगम के निकट। माघ मेले में ऋषि-मुनि उनके आश्रम में एकत्र होते थे।
भरद्वाजजी का आश्रम प्रयाग (प्रयागराज) में था — गंगा-यमुना-सरस्वती के त्रिवेणी संगम के निकट। बालकाण्ड में कहा — 'तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा।
जाहिं जे मज्जन तीरथराजा॥' अर्थ — तीर्थराज प्रयागमें जो स्नान करने जाते हैं उन ऋषि-मुनियोंका समाज वहाँ (भरद्वाजजीके आश्रममें) जुटता है।
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